गौतमबुद्धनगर और बुलंदशहर के 80 गांवों की कृषि योग्य भूमि पर प्रस्तावित ‘नया नोएडा’ का वास्तविक स्वरूप कैसा होगा? इसकी कल्पना करने के लिए हमें तत्कालीन कांग्रेस सरकार कार्यकाल में हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा निजी विकासकर्ताओं के हाथों में सौंप दिये गये आर जोन को उदाहरण के तौर पर लेना चाहिए।
हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मंजूर किए गए नये नोएडा के क्षेत्र को नोएडा प्राधिकरण द्वारा सुनियोजित तरीके से विकसित नहीं किया जाएगा। यहां नोएडा प्राधिकरण एक लाइसेंसिंग अथारिटी के रूप में काम करेगा।इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा जा रहा है। यह बिल्कुल हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा फरीदाबाद समेत अन्य कई जनपदों में निजी बिल्डरों को खुद जमीन खरीदकर हाउसिंग सोसाइटी विकसित करने का लाइसेंस जारी करने जैसा होगा। इस प्रक्रिया में प्राधिकरण भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में शामिल नहीं होता है बल्कि निजी परियोजनाओं को केवल मंजूरी देने का कार्य करता है। यह किसी क्षेत्र में सरकार और उसके प्राधिकरणों के लिए बगैर जिम्मेदारी उठाए अवैध कमाई का बेहद आसान तरीका है। इससे उस क्षेत्र का सुनियोजित और समुचित विकास नहीं हो पाता है और एक प्रकार से वह क्षेत्र अघोषित स्लम एरिया बनकर रह जाता है। इस प्रक्रिया का एक तात्कालिक फायदा भूमि मालिकों को होता है कि वह अपनी भूमि बेचते समय भरपूर सौदागिरी कर सकते हैं तथा एक के बाद दूसरी जमीन के रेट खुद ब खुद बढ़ जाते हैं। नोएडा प्राधिकरण और सरकार की मंशा के दृष्टिगत यह भी अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है कि प्रस्तावित नये नोएडा में आने वाले गांवों की भूमि पहले से ही कुछ चतुर लोगों द्वारा खरीद ली जाएगी और फिर भारी मुनाफा कमाया जा सकेगा। हरियाणा में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की इस समझदारी की सभी प्रशंसा करते हैं कि किसी घपले घोटाले में फंसे बगैर हुडा के माध्यम से केवल लाइसेंस जारी करने के नाम पर उन्होंने अभूतपूर्व आमदनी की। नया नोएडा उसी मार्ग पर अग्रसर होगा।(नेक दृष्टि हिंदी साप्ताहिक नौएडा)

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